क्या पहाड़ भी रंग बदलता है?

क्या पहाड़ भी रंग बदलता है?

गिरगिट के रंग बदलने की बात तो हम सभी ने सुनी है, परन्तु पहाड़ी के रंग बदलने की बात बहुत ही विचित्र लगती है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्षेत्र (Northern Territory) में आयर्स रॉक नामक पहाड़ी है, जो हर दिन और हर मौसम में रंग बदलती रहती है।

इस पहाड़ी का पता सबसे पहले सन् 1873 में एक अंग्रेज़ यात्री डब्ल्यू.जी. गोसे (W.G. Gosse) ने लगाया था। उन दिनों दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में हेनरी आयर्स (Henry Ayers) प्रधानमंत्री थे। उन्हीं के नाम पर इस पहाड़ी का नाम आयर्स रॉक रख दिया गया। यह अण्डाकार पहाड़ी 335 मीटर ऊँची है। इसकी गोलाई 7 किमी. और चौड़ाई 2.4 किमी. है। सामान्य तौर पर इस चट्टान का रंग लाल रहता है।

आस्ट्रेलिया में आयर्स रॉक नाम की पहाड़ी सूर्य किरणों के कोणों के अनुसार अपना रंग बदलती रहती है।

इसके रंगों में चमत्कारी परिवर्तन सुबह सूरज निकलने के समय और शाम को सूरज छिपने के समय होते हैं। प्रात:काल के समय जब सूर्य की किरणें इस पर पड़ती हैं, तो ऐसा लगता है कि मानो पहाड़ी पर आग लगी हुई है और बैंगनी तथा गहरे लाल रंग की लपटें निकल रहीं हों। इसी तरह शाम को सूरज छिपते समय लाल रंग से चमकती इस विशाल चट्टान पर अनोखी बैंगनी परछाइयाँ दिखने लगती हैं। सुबह से लेकर शाम तक इसका रंग कभी पीला, तो कभी नारंगी और लाल हो जाता है। कभी यह पहाड़ी बैंगनी तो कभी श्यामवर्णी हो जाती है।

आप सोचते होंगे कि यह ज़रूर कोई जादुई पहाड़ी या दैवी चमत्कार है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इस चट्टान के पत्थर की संरचना विशेष प्रकार की है। सूर्य से आनेवाली किरणों के दिनभर में बदलते कोण और मौसम परिवर्तनों द्वारा ही इसके रंग बदलते रहते हैं।

यह पहाड़ी बलुआ पत्थर (Sandstone) से बनी है, जिसे कोंग्लोमेरेट (Conglomerate) कहते हैं। सुबह और शाम के समय सूर्य से आनेवाले प्रकाश में लाल व नारंगी रंग की प्रचुरता होती है, क्योंकि दूसरे रंग वायुमण्डल के कणों द्वारा फैला (Scatter) दिए जाते हैं। इन्हीं दोनों रंगों के कारण और बलुआ पत्थर की विशेष सूचना के कारण यह पहाड़ी लाल और नारंगी दिखती है। दोपहर के समय सूर्य के प्रकाश में कुछ दूसरे रंग भी अधिक आने लगते हैं, इसलिए यह अपना रंग बदल देती है।

इस प्रकार रंगों के परिवर्तन के कारण ही प्राचीन समय में कबीलों में रहनेवाले इसे भगवान का घर मानते थे और तलहटी में बनी गुफाओं में पूजा किया करते थे। वे वहाँ चित्रकारी भी किया करते थे।

कुछ समय पहले यहाँ तक पहुँचना काफ़ी मुश्किल था, लेकिन अब तो यहाँ तक सड़कें बना दी गयी हैं। अब यह पहाड़ी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र बन गयी है। ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने इस पहाड़ी के पास 487 वर्ग मील के क्षेत्र में माउंट ओल्गा राष्ट्रीय पार्क (Mount Olga National Park) बना दिया है।

इस पार्क में ऑस्ट्रेलिया के कंगारू, बैंडीकूट, वालाबी, यूरो जैसे विचित्र जानवरों को भी रखा गया है, यहां नये-नये विचित्र पेड़ भी लगाए गए हैं. इन्हीं सब विचित्रताओं के कारण हर वर्ष हज़ारों लोग इस स्थान को देखने आने लगे हैं।

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