प्रेरक विचार (सुविचार)

प्रेरक विचार

१) दिन भर में लगभग ७२००० विचार मस्तिष्क में उठते हैं। जितना सकारात्मक (Positive) रहोगे, उतने सकारात्मक विचार आयेंगे।

२) अक्सर जिनके पास ख़ाली समय होता है, वे लोग ही दूसरों की बुराई किया करते हैं। काम करनेवालों के पास बुराई करने का वक़्त कहाँ होता है?

३) हमेशा उन लोगों की क़दर करो, जो आपसे बात करने के लिये अपना अमूल्य समय ख़ाली कर देते हैं; न कि उनका जो अपना ख़ाली समय आपसे बात करने में व्यतीत करते हैं।

४) समाज में जीने के लिये बेईमानी का सहारा कभी मत लेना। बेईमानी वह दलदल है, जिसमें धँसने के बाद इन्सान उसमें से निकल नहीं पाता।

५) जहाँ भोलेपन की हँसी उड़ाई जाती है और कपटपूर्ण व्यवहार को समझदारी का नाम दिया जाता है, ऐसे समाज से दूर ही रहना।

६) किसी के भोलेपन को बेवकूफ़ी मत समझो, हो सकता है वह हमसे और अ‍ापसे ज़्यादा समझदार हो।

७) जो इन्सान ख़ुद हारकर किसी को जिता देता है, उसको ईश्वर कभी हार की पीड़ा महसूस नहीं होने देता।

८) वो हर क़ामयाबी ‘हार’ है, जिसका मक़सद किसी को नीचा दिखाना हो और वो हर हार ‘जीत’ है, जिसका मक़सद किसी का हौसला बढ़ाना हो।

९) ज़िन्दगी में मनचाहा रास्ता बना बनाया नहीं मिलता है, ख़ुद बनाना पड़ता है। जिसने जैसा रास्ता बनाया, उसे वैसी ही मंज़िल मिलती है।

१०) अपने लिये ना सही उनके लिए कामयाब बनो, जो आपको नाकामयाब देखना चाहते हैं।

११) आशा चाहे कितनी भी कम हो, निराशा से बेहतर ही होती है।

१२) भरोसा और उम्मीद वह शक्ति है, जिससे आप अदृश्य को भी देख सकते हैं, अविश्वसनीय पर विश्वास कर सकते हैं और असंभव को भी संभव बना सकते हैं।

१३) शान्त और स्थिर मन से जीवन की हर एक लड़ाई जीती जा सकती है।

१४) बुरा लग जाये, ऐसा ‘सत्य’ ज़रूर बोलो, लेकिन सत्य लगे, ऐसा ‘झूठ’ कभी मत बोलो।

१५) शब्दों का भी तापमान होता है। ये सुकून भी देते हैं, जला भी देते हैं।

१६) ‘सुन लेने से’ कितने सारे सवाल सुलझ जाते हैं और ‘सुना देने से’ कितनी उलझनें बढ़ जाती हैं।

१७) बोलनेवाले की आवाज़ सभी सुन लेते हैं, लेकिन असली श्रोता वो है, जो मौन रहनेवाले की आवाज़ भी सुन लेता है।

१८) कभी आँसू आयें तो ख़ुद पोंछ लेना, दुनियावाले पोंछने आयेंगे तो सौदा करेंगे।

१९) कुछ लोग ज़िन्दगी में होते हैं,
कुछ लोग होते हैं
तो ज़िन्दगी होती है।

२०) जिसमें अहम् कम होता है
उसकी अहमियत ज़्यादा होती है!

२१) अच्छे लोगों की परीक्षा कभी न लीजिये; क्योंकि वे पारे की तरह होते हैं, जब उन पर चोट किय‍‍ा जाता है, तो वे टूटते नहीं, अपितु फिसलकर चुपचाप आपकी ज़िन्दगी से निकल जायेंगे।

२२) किसी चीज़ की बहुत आकांक्षा करने से पहले यह देख लें कि जिनके पास वह चीज़ पहले से ही है, वे लोग कितने सुखी हैं?

२३) आप अपने भविष्य का फैसला मत करो, आप सिर्फ़ अपनी आदतों का फैसला करो और आपकी आदतें आपके भविष्य का फैसला करेंगी। आपकी आदतें ही आपके किरदार और व्यक्तित्व की निशानी हैं।

२४) ज़्य‍ादा बोझ अक्सर डूबा देता है, फिर चाहे वह अभिमान का हो या सामान का हो। इसलिए स्वयं को अहंकार और सम्पत्ति के बोझ से मुक्त रखो।

२५) आनन्द की कोई परिभाषा नहीं होती, ग़रीब के घर नई साइकिल की ख़ुशी भी BMW से कम नहीं।

Leave a Reply