हिंदी लिखावट कैसे सुधारें

हिंदी लिखावट कैसे सुधारें

हस्तलेखन (हैंडराइटिंग) अच्छी प्रतिभा का सूचक माना जाता है। आज भले ही कम्प्यूटर या मोबाइल से शब्द टाइप कर दिये जाते हैं, किन्तु अच्छी लिखावट देखकर हर कोई एक बार प्यार भरी निगाहों से हमारी तरफ़ ज़रूर देखता है।

अच्छी पदवी पर बैठे अधिकारी की भी लिखावट गन्दी हो तो उसे कभी-कभी लोगों के सामने झेंपना पड़ता है, अतः अच्छी लिखावट की उलाहना नहीं की जा सकती। हमें इस बात को स्वीकारना ही होगा कि अच्छी लिखावट अच्छी प्रतिभा का द्योतक है।

अच्छी लिखावट के साथ भाषा के प्रति भी अच्छी समझ रखनेवाले बहुत कम देखने मिलते हैं। प्रायः भाषाविद् लोगों की लिखावट अच्छी नहीं होती और जिनकी लिखावट अच्छी हो, उन्हें भाषा की समझ नहीं होती। अतः हम अपने जीवन में लिखावट और भाषा के समन्वय को लाने का प्रयास अवश्य करना चाहिये।

ख़ैर, आज के इस पोस्ट में मैं हैंडराइटिंग के बारे में ऐसी बातें बताऊँगा, जिसे अमल में लाने पर आपकी लिखावट कितनी भी ख़राब हो, यदि इसे आज़मायेंगे तो निश्चित ही आपकी लिखावट सुन्दर हो जायेगी।

 

१) क़लम को कभी भी बहुत दबाकर न पकड़ें, ना ही एकदम हल्के हाथ से पकड़ें।

२) सामान्यतः अगूँठा, तर्जनी और मध्यमा से क़लम पकड़ने का अभ्यास करें, किन्तु यह कोई नियम नहीं है, आपको जो सुविधाजनक लगे, उस तरह से भी पकड़ा जा सकता है।

३) अक्षर एकदम बड़ा भी न लिखें, ना ही एकदम छोटा; क्योंकि बड़ा लिखने पर उसकी निरन्तरता क़ायम नहीं रह पाती, इसी छोटा लिखने पर भी यही दिक़्क़त आती है। इसलिये जो आपके लिये सहज हो, उसी सामान्य आकार में लिखने का प्रयास करें।

४) यदि आप अक्षरों को तिरछा लिखते हैं तो सारे अक्षर उसी तरह लिखें और सीधा लिखते हैं तो सारे अक्षर सीधा ही लिखें; क्योंकि एक अक्षर तिरछा एक अक्षर सीधा लिखने पर अापकी लिखावट कितनी भी अच्छी हो, उसमें आकर्षण नहीं होगा।

५) हर वर्ण और शब्द के बीच एक मर्यादित दूरी बनाकर लिखें। लिखते समय उस दूरी को बरक़रार रखें। इससे सामनेवाले को पढ़ने में कठिनाई नहीं होगी और आपकी लिखावट अत्यन्त आकर्षक और सुन्दर लगेगी।
[लिखते समय प्रायः कुछ-न-कुछ शब्द या विभक्ति छूट जाते हैं, यदि आपके लिखावट में शब्दों के बीच मर्यादित दूरी रहेगी तो जो शब्द छूट गया है, वह लिखा जा सकता है।]

६) आप एक रफ़ बुक बना लीजिये, जिसमें एक ही अक्षर को बार-बार लिखो, जब तक आपके मन अच्छा न लगे। चाहे उसके लिये, कितने पन्ने लिखने पड़े, लिखते जायें और इसी प्रकार सार वर्णों (अक्षरों) का अभ्यास करें; क्योंकि जब तक आपकी वर्ण-रचना सुन्दर न होगी, आपकी लिखावट में आकर्षण नहीं होगा, इसलिये अभ्यास करें; क्योंकि अभ्यास से सब कुछ सम्भव है।

७) अच्छी लिखावट में क़लम का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है, आप अपनी रुचि के अनुसार क़लम का चयन अवश्य करें।

८) आज के समय में कॅलीग्राफ़ी पेन बाज़ार में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। 0.1 नीब की कॅलीग्राफ़ी पेन से सामान्य आकार में हिन्दी और अँग्रेज़ी की लिखावट अत्यन्त उभरकर आती है। यदि आप हस्तलेखन के शौकीन हैं तो इसकी आज़माइश ज़रूर करें।

९) घर पर भी आपके बैठने की स्थिति औेर गर्दन का झुकाव पाठशाला के बैंच जैसी हो तो बहुत बेहतर है, किन्तु यह आवश्यक नहीं है। यदि आपके मन में धुन है तो बिन सामग्रियों के भी लक्ष्य को पाया जा सकता है।

१०) किसी भी कार्य के लिये अभ्यास बहुत ज़रूरी है; जादू से कोई काम नहीं होता, इसलिये अभ्यास (Practice) को अपने जीवन का अंग बना लो।

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  1. Niraj sinha February 22, 2021

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