ABHI TOH RAAT BAQI HAI LYRICS 1969

ABHI TOH RAAT BAQI HAI LYRICS 1969

❛ अभी तो रात बाक़ी है…❜

ADLIB अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना
अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना
घड़ी भर को दिले-नादाँ, सँभल जाये तो सो जाना
अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना… ||ध्रु.||
ये जलते होंठ और ये नींद में डूबी हुईं आँखें (२)
मुझे सोने नहीं देती, तुम्हारी अधखुली आँखें
ज़रा ठहरो, मुझे भी नींद आ जाये तो सो जाना
अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना
घड़ी भर को दिले-नादाँ, सँभल जाये तो सो जाना
अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना… ||१||
मेरी आग़ोश में आकर, न लो मदहोश अँगड़ाई (२)
कहीं बहका न दे मुझको, ये अँगड़ाई ये तनहाई
ये तनहाई मुहब्बत में, बदल जाये तो सो जाना
अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना
घड़ी भर को दिले-नादाँ, सँभल जाये तो सो जाना
अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना… ||२||
हसीं हो तुम, तुम्हें क्या ग़म, तुम्हें तो नींद प्यारी है (२)
हमारा हाल मत पूछो, के हम पर रात भारी है
हमारे सर क़यामत है, ये टल जाये तो सो जाना
अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना
घड़ी भर को दिले-नादाँ, सँभल जाये तो सो जाना
हुँम् हुँम् हुँम् हुँऽऽऽऽम्… हुँम् हुँम् हँम् हुँम् (४)… ||३||
फ़िल्म:- बन्दिश (१९६९)
गीतकार: अकलम हैदराबादी
संगीतकार:- उषा खन्ना
गायक:- मोहम्मद रफ़ी

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अभी तो रात बाक़ी है.बन्दिश (१९६९)

 

ADLIB अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना

अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना
घड़ी भर को दिले-नादाँ, सँभल जाये तो सो जाना
अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना… ||ध्रु.||

ये जलते होंठ और ये नींद में डूबी हुईं आँखें (२)
मुझे सोने नहीं देती, तुम्हारी अधखुली आँखें
ज़रा ठहरो, मुझे भी नींद आ जाये तो सो जाना
अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना
घड़ी भर को दिले-नादाँ, सँभल जाये तो सो जाना
अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना… ||१||

मेरी आग़ोश में आकर, न लो मदहोश अँगड़ाई (२)
कहीं बहका न दे मुझको, ये अँगड़ाई ये तनहाई
ये तनहाई मुहब्बत में, बदल जाये तो सो जाना
अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना
घड़ी भर को दिले-नादाँ, सँभल जाये तो सो जाना
अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना… ||२||

हसीं हो तुम, तुम्हें क्या ग़म, तुम्हें तो नींद प्यारी है (२)
हमारा हाल मत पूछो, के हम पर रात भारी है
हमारे सर क़यामत है, ये टल जाये तो सो जाना
अभी तो रात बाक़ी है, ये ढल जाये तो सो जाना
घड़ी भर को दिले-नादाँ, सँभल जाये तो सो जाना
हुँम् हुँम् हुँम् हुँऽऽऽऽम्… हुँम् हुँम् हँम् हुँम् (४)… ||३||

फ़िल्म:- बन्दिश (१९६९)
गीतकार: अकलम हैदराबादी
संगीतकार:- उषा खन्ना
गायक:- मोहम्मद रफ़ी

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