Category: अध्यात्म

कबीर की उल्टवासियाँ

कबीर की उल्टवासियाँ इस लेख में कबीरसाहेब की उल्टवासियाँ कही गयी हैं, जो समझ जाने पर सीधी हैं। साँझ पड़ी दिन ढल गया, बाघिन घेरी गाय। गाय बिचारी न …

चातुर्मास का महत्त्व

चातुर्मास का महत्त्व (१० जुलाई से ४ नवम्बर २०२२ तक) ‘स्कन्द पुराण’ के ब्रह्मखण्ड के अन्तर्गत ‘चतुर्मास माहात्म्य’ में आता है, सूर्य के कर्क राशि पर स्थित रहते हुए …

अहंकार को अंग

अहंकार को अंग (कबीर के दोहे) अहंकार का वास्तव में कोई अस्तित्व नहीं है, किन्तु सारे संसार के हर मनुष्य को इसने निगल रखा है। छोटे-से-छोटे और बड़े-से-बड़े व्यक्ति …

अब पछिताय होत क्या चिड़िया चुग गयी खेत

अब पछिताय होत क्या चिड़िया चुग गयी खेत आछे दिन पाछे गये, हरि से किया न हेत। अब पछिताय होत क्या, चिड़िया चुग गयी खेत।। यह दोहा आपने भले …

आद्य शंकराचार्य की आयु कैसे बढ़ी?

आद्य शंकराचार्य की आयु कैसे बढ़ी? श्रीमद् आद्य शंकराचार्य उच्चकोटि के ब्रह्मनिष्ठ सन्त थे। एक दिन वे उत्तरकाशी में अपने शिष्यों को ‘ब्रह्मसूत्र-भाष्य’ (शारीरिक सूत्र भाष्य) पढ़ा रहे थे। …

ईश्वर माँ की तरह हैं

ईश्वर माँ की तरह हैं प्रस्तुत लेख स्वामी रामसुखदासजी महाराज के सत्संग का अंश है। साधन सुधा सिन्धु (भक्तियोग) गीताप्रेस गोरखपुर की पुस्तिका में प्रकाशित है। स्वामीजी ने माँ …

आत्म अनुभव को अंग

आत्म अनुभव को अंग (कबीर के दोहे) आत्मा कहते हैं अपने आपको। इस प्रसंग में अपने आपके अनुभव की ओर संकेत है। नर नारी के सुख को, खँसी नहीं …

वेदव्यास का जन्म कैसे हुआ

महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास से शायद ही कोई सनातनधर्मी अपरिचित हो। महाभारत के अलावा महर्षि वेदव्यास ने १८ पुराणों एवं ब्रह्मसूत्र की रचना की। कहा जाता है, संसार …

श्रेयान् स्वधर्मो विगुण:

श्रेयान् स्वधर्मो विगुण: श्रेयान् स्वधर्मो विगुण: परधर्मात् स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह:॥ यह भगवद्गीता के तीसरे अध्याय का ३५वाँ श्लोक है। वर्तमान समय में पढ़ा-लिखा सभ्य, लेकिन संस्कार …

सर्वधर्मान्परित्यज्य

सर्वधर्मान्परित्यज्य… सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच:॥६६॥ यह श्रीमद्गवद्गीता के अठारहवें अध्याय का ६६ वाँ श्लोक है। जो गीता का सबसे गुह्य श्लोक माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने करुणा करके अर्जुन से …