Category: धर्म की बातें

कर्म का फल (गरुड़ पुराण)

कर्म का फल (गरुड़ पुराण_अध्याय-225) कर्म का फल मनुष्य को भोगना ही पड़ता है। शास्त्र की कुछ बातें मनुष्य समझ से परे होती है, धार्मिक वृत्ति का मनुष्य उसे …

गरुड़ पुराण क्या है?

गरुड़ पुराण क्या है? समाज में किसी चीज़ के प्रति कभी-कभी ग़लत धारणाएँ बन जाती हैं। ऐसी ही धारण गरुड़ पुराण के प्रति हमारे मन में घर कर गयी …

नवार्ण मंत्र क्या है?

नवार्ण मंत्र क्या है? नवार्ण का अर्थ होता है, नौ वर्ण अर्थात् नौ अक्षर। नवार्ण मन्त्र का अर्थ हुआ नौ वर्णों (अक्षरों) वाला मन्त्र। जो इस प्रकार है ।।ऐं …

अथर्वशीर्ष क्या है?

अथर्वशीर्ष का अर्थ होता है, अथर्ववेद का शिरोभाग। वेद के चार भाग है, १)संहिता, २)ब्राह्मण, ३)आरण्यक तथा ४)उपनिषद्। जिन्हें श्रुति कहा जाता है। पाँच अथर्वशीर्ष हैं─ गणपत्यथर्वशीर्षम्, शिवाथर्वशीर्षम्, देव्यथर्वशीर्षम्, …

ग्रहण क्या है?

ग्रहण क्या होता है? इस समय क्या लाभ और क्या हानि होती है? क्या करना चाहिये और क्या नहीं? ग़लत कार्य करने के दुष्परिणाम और सत्कर्म करने के पुण्यशाली …

ब्रह्मचर्य क्या है

जिसका मन स्तम्भित (संयमित) है, वही ब्रह्मचर्य का पालन कर सकता है। आइये, आपको ऐसे एक मन्त्र से परिचित करायें, जिसकी सहायता से ब्रह्मचर्य अर्थात् मन की वृत्तियों को …

मृत्यु क्या है?

मृत्यु के बारे अनेक जिज्ञासाएँ हमारे मन मेें उत्पन्न होती हैं, जैसे मृत्यु के समय क्या होता है? क्या आत्महत्या करने के बाद दुःखों का अन्त हो जाता है? …

बीज मंत्र का सही उच्चारण

प्रायः बीजमन्त्र का शाब्दिक अर्थ कुछ नहीं होता, परन्तु इसके जप से दैवी शक्तियों से साधक का सीधे तादाम्य होने लगता है। हर देवी-देवताओं के बीजमन्त्र अलग-अलग होते हैं। …

सबसे बड़ा मंत्र

हिन्दू धर्म में अनेक देवी-देवताओं के मन्त्र और स्तोत्र हैं। हर स्तोत्र के अन्तर्गत उस देवी-देवता को सर्वस्व कहा जाता है। जैसे आदित्यहृदय स्तोत्र में भगवान् सूर्य को सर्वस्व …