Category: धर्म की बातें

चातुर्मास का महत्त्व

चातुर्मास का महत्त्व (१० जुलाई से ४ नवम्बर २०२२ तक) ‘स्कन्द पुराण’ के ब्रह्मखण्ड के अन्तर्गत ‘चतुर्मास माहात्म्य’ में आता है, सूर्य के कर्क राशि पर स्थित रहते हुए …

आद्य शंकराचार्य की आयु कैसे बढ़ी?

आद्य शंकराचार्य की आयु कैसे बढ़ी? श्रीमद् आद्य शंकराचार्य उच्चकोटि के ब्रह्मनिष्ठ सन्त थे। एक दिन वे उत्तरकाशी में अपने शिष्यों को ‘ब्रह्मसूत्र-भाष्य’ (शारीरिक सूत्र भाष्य) पढ़ा रहे थे। …

ईश्वर माँ की तरह हैं

ईश्वर माँ की तरह हैं प्रस्तुत लेख स्वामी रामसुखदासजी महाराज के सत्संग का अंश है। साधन सुधा सिन्धु (भक्तियोग) गीताप्रेस गोरखपुर की पुस्तिका में प्रकाशित है। स्वामीजी ने माँ …

वेदव्यास का जन्म कैसे हुआ

महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास से शायद ही कोई सनातनधर्मी अपरिचित हो। महाभारत के अलावा महर्षि वेदव्यास ने १८ पुराणों एवं ब्रह्मसूत्र की रचना की। कहा जाता है, संसार …

कर्म का फल (गरुड़ पुराण)

कर्म का फल (गरुड़ पुराण_अध्याय-225) कर्म का फल मनुष्य को भोगना ही पड़ता है। शास्त्र की कुछ बातें मनुष्य समझ से परे होती है, धार्मिक वृत्ति का मनुष्य उसे …

गरुड़ पुराण क्या है?

गरुड़ पुराण क्या है? समाज में किसी चीज़ के प्रति कभी-कभी ग़लत धारणाएँ बन जाती हैं। ऐसी ही धारण गरुड़ पुराण के प्रति हमारे मन में घर कर गयी …

नवार्ण मंत्र क्या है?

नवार्ण मंत्र क्या है? नवार्ण का अर्थ होता है, नौ वर्ण अर्थात् नौ अक्षर। नवार्ण मन्त्र का अर्थ हुआ नौ वर्णों (अक्षरों) वाला मन्त्र। जो इस प्रकार है ।।ऐं …

अथर्वशीर्ष क्या है?

अथर्वशीर्ष का अर्थ होता है, अथर्ववेद का शिरोभाग। वेद के चार भाग है, १)संहिता, २)ब्राह्मण, ३)आरण्यक तथा ४)उपनिषद्। जिन्हें श्रुति कहा जाता है। पाँच अथर्वशीर्ष हैं─ गणपत्यथर्वशीर्षम्, शिवाथर्वशीर्षम्, देव्यथर्वशीर्षम्, …

ग्रहण क्या है?

ग्रहण क्या होता है? इस समय क्या लाभ और क्या हानि होती है? क्या करना चाहिये और क्या नहीं? ग़लत कार्य करने के दुष्परिणाम और सत्कर्म करने के पुण्यशाली …