Category: स्तोत्र-संग्रह

शिवरक्षास्तोत्रम्

शिवरक्षास्तोत्र श्री हरि के पावन मुख से निःसृत होने के कारण इसका एक एक श्लोक मन्त्र के समान शक्तिशाली है। आरोग्यदायी होने के साथ साथ यह एक अमोघ रक्षा …

कालभैरवाष्टकम्

कालिकापुराण के अनुसार भैरव शिवजी के गण हैं। इनका वाहन कुत्ता है। किसी भी शक्तिपीठ पर इनकी पूजा और प्रसन्नता के बाद ही देवी की पूजा फलीभूत मानी जाती …

देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्

देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम् का पाठ प्रायः देवी उपासना में हुई भूल के प्रति किया जाता है। शंकराचार्य द्वारा रचित प्रत्येक स्तोत्र अपने आपमें अद्भुत और अद्वितीय है। उनकी रचना का लय …

मृत्युंजय स्तोत्र अर्थ

कैलास के शिखर पर जिनका निवासगृह है, जिन्होंने मेरुगिरि का धनुष, नागराज वासुकि की प्रत्यंचा और भगवान् विष्णु को अग्निमय बाण बनाकर तत्काल ही दैत्यों के तीनों परों को …

चतुःश्लोकी भागवत

चतुःश्लोकी भागवत भगवान् विष्णु द्वारा ब्रह्माजी को दिया गया उपदेश है, जो तत्त्वज्ञान का बोध कराता है। यह अनुष्टुप् छन्द पर आधारित है। ३ से ६ श्लोक मूल चतुःश्लोकी …

महालक्ष्मी अष्टकम्

महालक्ष्मी अष्टकम् जीवन में हर कोई चाहता है कि माँ लक्ष्मी की कृपा उस पर सदैव बनी रहे। शास्त्रों में माता लक्ष्मी के अनेक स्तोत्र हैं, जिनके पाठ से …

मृत्युंजय स्तोत्र

रत्न सानु शरासनं रजताद्रि शृङ्ग निकेतनं शिञ्जिनी कृत पन्नगेश्वर मच्युता नल सायकम्। क्षिप्र दग्ध पुर त्रयं त्रि दशाल यैरभि वन्दितं चन्द्र शेखर माश्रये मम किं करिष्यति वै यमः।।१।।

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र बोलना सीखें | Mahishasura mardini stotram

अयि गिरि नन्दिनि नन्दित मेदिनिविश्व विनोदिनि नन्दि नुतेगिरिवर विन्ध्य शिरोधिनि वासिनिविष्णु विलासिनि जिष्णु नुते।भगवति हे शिति कण्ठ कुटुम्बिनिभूरि कुटुम्बिनि भूति कृतेजय जय हे महिषा सुर मर्दिनिरम्य कपर्दिनि शैल सुते।।१।।