Category: स्तोत्र-संग्रह

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र अर्थसहित

पर्वतराज हिमालय की कन्यारूपिणी, पृथ्वी को आनन्दित करनेवाली, संसार को हर्षित रखनेवाली, नन्दीगणों से नमस्कार की जानेवाली, गिरिश्रेष्ठ विन्ध्याचल के शिखर पर निवास करनेवाली, भगवान् विष्णु को प्रसन्न रखनेवाली, …

पुरुष सूक्त मूलपाठ

❑➧ॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्।स भूमिᳬं सर्वत स्पृत्वाऽत्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्।।१।।❍ ॐ सहस्र शीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्र पात्।स भूमिᳬं सर्वत स्पृत्वा ऽत्यतिष्ठ द्दशाङ्गुलम्।।१।।

श्री राम स्तुति अर्थ

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरणभवभयदारुणं।भगवान श्रीराम की यह स्तुति हरिगीतिका छन्द के आधार पर सन्तकवि तुलसीदास द्वारा लिखी गयी है।

शिवपंचाक्षर स्तोत्र अर्थ

जिनके कण्ठ में सर्पों का हार है, जिनके तीन नेत्र हैं, भस्म ही जिनका अंगराग है और दिशाएँ ही जिनका वस्त्र हैं अर्थात् जो दिगम्बर (निर्वस्त्र) हैं ऐसे शुद्ध …

देवी कवच

देवी कवच श्रीदुर्गा सप्तशती में देवी कवच का उल्लेख है। देवी भक्त जानते ही होंगे कि इसका पाठ हर प्रकार से भक्तों की रक्षा करता है। जो इस कवच …

कनकधारा स्तोत्र मूल पाठ

अङ्गं हरेः पुलक भूषण माश्रयन्ती भृङ्गाङ्ग नेव मुकुला भरणं तमालम्। अङ्गी कृताखिल विभूतिर पाङ्गलीला माङ्गल्य दास्तु मम मङ्गल देवताया।।१।।

भवान्यष्टकम् हिन्दी अर्थ

पुत्र पापी हो या पुण्यात्मा, निर्बल हो या बलवान, निर्धन हो या धनवान, संकट में हो या आनन्द में हर काल, हर अवस्था में वह माँ के लिये बेटा …

गणपति अथर्वशीर्ष मूल लघु

गणपत्यथर्वशीर्षम् में कुल १४ अनुच्छेद हैं। जिनमें १० अनुच्छेद मूल गणपत्यथर्वशीर्ष है और अन्त के ४ अनुच्छेद में इसकी फलश्रुति है। कुछ लोग १० अनुच्छेद तक ही इसका पाठ …

सप्तश्लोकी दुर्गा हिन्दी अर्थ | saptashloki durga meaning

सप्तश्लोकी दुर्गा में माँ दुर्गा की स्तुति है। देवी भक्तों के लिये यह नित्य पठनीय है। देवी भक्त तो जानते होंगे कि दुर्गा सप्तशती के आरम्भ में ही इसका …

कनकधारा स्तोत्र हिन्दी अर्थ

कनकधारा स्तोत्र हिन्दी अर्थ ❀ श्री कनकधारास्तोत्रम् ❀(❑➧मूलश्लोक ❑अर्थ➠सहित) ❑➧अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्तीभृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम्।अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीलामाङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवताया।।१।।❑अर्थ➠ जैसे भ्रमरी अधखिले पुष्पों से अलंकृत तमाल-तरु (पत्तों के पेड़) का आश्रय लेती …